Wednesday, 03-06-2026
नमस्कार हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेसा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91-9997782004 , हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें | अन्य शहरों की ख़बरें देने के लिए एवं रिपोर्टर बनने के लिए संपर्क कर सकते है (संपादक : अरविन्दर सिंह मिक्की) मोबाइल नंबर : +91-9997782004

जेई व सुपरवाइजर की मिलीभगत से अवैध निर्माणों की भरमार, करोड़ों के राजस्व नुकसान का आरोप

जेई व सुपरवाइजर की मिलीभगत से अवैध निर्माणों की भरमार, करोड़ों के राजस्व नुकसान का आरोप

मनोज शर्मा 

बरेली में अवैध निर्माणों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि थाना सुभाषनगर एवं थाना कोतवाली क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बिना स्वीकृत मानचित्र और नियमों की अनदेखी कर निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित जेई और सुपरवाइजर की कथित मिलीभगत के चलते अवैध निर्माणों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कई व्यावसायिक एवं आवासीय भवन निर्माण कार्य बिना आवश्यक अनुमतियों के जारी हैं, जिससे सरकारी नियमों की खुली अवहेलना हो रही है। साथ ही इससे बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है।

लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्यों की समय-समय पर जांच की जाए तो कई ऐसे मामले सामने आ सकते हैं जहां मानचित्र स्वीकृति, विकास शुल्क और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

नागरिकों ने मांग की है कि थाना सुभाषनगर वाजपेई स्वीट्स का अवैध निर्माण, प्राइम सिटी के बराबर बन रहे अवैध मकान पराग दूध फैक्ट्री के सामने कट रही अवैध कॉलोनी और थाना कोतवाली क्षेत्र में चालान के बाद भी निर्माण जारी रामपुर गार्डन अवैध निर्माण टेलीफोन एक्सचेंज के बराबर में अवैध निर्माण ,बड़े बाजार में 11 दुकान बरेली विकास प्राधिकरण द्वारा सील की गई थी शिव प्रकाश जयसवाल की सुपरवाइजर व जेई मिलकर सील खुलवा सूत्र बताते हैं  निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जिन भवनों का निर्माण नियमों के विपरीत हो रहा है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए ताकि राजस्व हानि और अवैध निर्माणों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाला है, बल्कि शहर की सुनियोजित विकास व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।