बरेली में कानून पर सवाल: अफसरों के काफिले बिना फिटनेस-बीमा सड़कों पर जिला अधिकारी भी शामिल
बरेली में कानून पर सवाल: अफसरों के काफिले बिना फिटनेस-बीमा सड़कों पर
बरेली। जिले में जिन अधिकारियों के हाथों में कानून लागू कराने की जिम्मेदारी है, उन्हीं के सरकारी काफिले नियमों को सरेआम ताक पर रखे नजर आ रहे हैं। एम-परिवहन ऐप पर सरकारी वाहनों का स्टेटस चेक किया गया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कहीं वाहन का बीमा 01 जनवरी 1901 तक वैध दिख रहा है, कहीं फिटनेस वर्षों पहले एक्सपायर हो चुकी है, तो कहीं वाहन तय आयु सीमा पार कर चुका है।
सवाल सीधा है—जब आम नागरिकों के लिए नियम सख्त हैं, तो अफसरों के लिए वही नियम ढीले क्यों हैं? इन्हीं मानकों के तहत पुलिस रोजाना गांव-कस्बों से आने वाले लोगों के सैकड़ों चालान काटती है, लेकिन सरकारी वाहनों पर कार्रवाई न के बराबर है।
जिले के वर्तमान सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्रिहोत्री के सरकारी वाहन UP25AG0704 का रजिस्ट्रेशन 16 नवंबर 2015 का है। इसकी फिटनेस 15 नवंबर 2017 तक ही वैध थी, जबकि वाहन की निर्धारित उम्र भी पूरी हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि ऐप में इसका बीमा 01 जनवरी 1901 तक दर्शाया गया है।
वहीं, जिलाधिकारी अविनाश सिंह के सरकारी वाहन UP25AG1111 का रजिस्ट्रेशन 21 दिसंबर 2015 का है और ऐप के अनुसार इसकी फिटनेस 8 अक्टूबर 2024 को समाप्त हो चुकी है।
विकास भवन के वाहनों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। डीडीओ का वाहन UP32AG0955 फिटनेस एक्सपायर्ड दिखा। जबकि पीडी चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव के वाहन UP32AG0632 की फिटनेस 23 अप्रैल 2017 तक, बीमा 01 जनवरी 1901 तक और पीयूसीसी 20 नवंबर 2022 तक ही वैध दर्ज है।
आरटीओ पंकज सिंह का कहना है कि नियम सरकारी और निजी वाहनों के लिए समान हैं और फिटनेस, बीमा व पीयूसीसी का नवीनीकरण अनिवार्य है। डीएम ने प्रकरण पर संज्ञान लेने की बात कही है, लेकिन देखना यह है कि कार्रवाई कागजों तक सीमित रहती है या सड़कों पर भी नियम लागू होते हैं।