Thursday, 05-11-2026
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तेग बहादुर जी के शहादत पर्व की पूर्व संध्या वैरागमई कीर्तन दरबार

तेग बहादुर जी के शहादत पर्व की पूर्व संध्या वैरागमई कीर्तन दरबार


बरेली        सिक्खों के नौंवे गुरू साहिब श्री गुरू तेग बहादुर जी के पावन शहीदी पर्व की पूर्व संध्या पर गुरुद्वारा श्री गुरू तेग बहादुर (फर्राशी टोला) में वैरागमई कीर्तन दरबार सजाया गया। जिसमें श्री दरबार साहिब अमृतसर से आए पंथ प्रसिद्ध रागी भाई करनजीत सिंघ ने शबद तेग बहादुर के चलत भयो जगत को सोक, है है है सभ  जग भयो, जै जै जै सुर लोकि दिल्ली से आए पंथ प्रसिद्ध प्रचारक भाई अंग्रेज सिंघ ने साहिब श्री गुरू तेग बहादुर जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार गुरू तेग बहादुर साहिब ने 

कश्मीरी पंडितों की गुहार सुनकर हिन्दू धर्म की रक्षा हेतु तत्कालीन शासक औरंगजेब के तुगलकी फरमान पर अपना बलिदान कर दिया। उनके साथ गए सिक्ख भाई मती दास को आरे से चीर कर शहीद किया गया, भाई सतीदास को रुई में लपेट कर जला कर शहीद किया गया एवं भाई दयाला जी को पानी में उबाल कर शहीद किया गया। उसके बाद गुरू तेग बहादुर साहिब जी के सिर को धड़ से अलग कर दिया गया। कार्यक्रम की प्रारम्भता नियमानुसार सोदर के पाठ से हुई हुजूरी रागी भाई धन्निदर सिंघ ने आरती शबद कीर्तन गायन किया, हेड ग्रंथी ज्ञानी बलजीत सिंघ ने गुरू तेग बहादुर साहिब द्वारा श्री गुरू ग्रंथ साहिब में अंकित गुरुवाणी के बारे में बताया उन्होंने कि गुरू तेग बहादुर साहिब जी कहते हैं 

"भै काहू कुछ देत नहि, नहि भै मानत आन"

अरदास एवं हुकुमनामे के साथ समाप्ति हुई सारी संगत ने गुरू का लंगर अटूट छका । संचालन मालिक सिंघ कालङा ने किया। इस अवसर पर अमरजीत सिंघ कालङा, महेन्द्र सिंघ, रविन्द्र  सिंघ, हरवन्त पाल सिंघ बेदी, गुरमीत सिंघ, राजिंदर सिंघ, अमन सोढ़ी, गुरदीप सिंघ, राजा चावला, एम पी सिंघ, भूपेन्द्र सिंघ का सहयोग रहा। कमेटी के अध्यक्ष सरदार कुलदीप सिंघ पन्नू ने बताया। मुख्य दीवान आज 28 नवंबर सोमवार को गुरुद्वारा दुःख निवारण संजय नगर में सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक सजेगा। गुरू का लंगर अटूट बरतेगा। जो पूरा कार्यक्रम का प्रसारण LIVE किया जाएगा

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