प्रकाश पर्व की पूर्व संध्या पर सजा अलौकिक कीर्तन दरबार
प्रकाश पर्व की पूर्व संध्या पर सजा अलौकिक कीर्तन दरबार
बरेली सिक्खों के छठे गुरू साहिब श्री गुरू हरि गोबिंद जी के पावन प्रकाश पर्व पर रविवार गुरुद्वारा जनकपुरी में एक अलौकिक कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया जिसमें पंथ प्रसिद्ध प्रचारक ज्ञानी प्रदीप सिंघ (चंडीगढ़) ने गुरू हरि गोबिंद साहिब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 11 वर्ष की आयु में गुरू पिता पंचम पातशाह साहिब श्री गुरू अर्जुनदेवजी की शहादत के बाद जब गुरता गद्दी संभाली बाबा बुड्ढा जी ने गुरता गद्दी के समय दो किरपाने धारण कारवाई । एक मीरी की एक पीरी की एक शासन हेतु एवं एक गरीब मजलूम की रक्षा हेतु। श्री दरबार साहिब (अमृतसर साहिब) के पंथ प्रसिद्ध रागी भाई बिक्रमजीत सिंघ गुरुवाणी कीर्तन द्वारा संगत को भाव विभोर किया।उन्होंने शबद "ऐसे गुर कुछ बलि बलि जाईऐ आपि मुकतु मोहि तारै" गायन किया। इतिहास बताता है कि गुरू हरि गोबिंद साहिब ने ही ग्वालियर की कैद से 52 राजाओं को भी आजाद करवाया था। संचालन सुखबीर सिंघ ने किया। मुख्य सेवादार रविन्द्र सिंघ बग्गा ने संगत का सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। रंजीत सिंघ, बलविंदर सिंघ, सुरजीत सिंघ, रविन्द्र पाल सिंघ, कुलदीप सिंघ, राकेश सिंघ, रोमी, हरनाम सिंघ आदि का विशेष सहयोग रहा। समाप्ति के पश्चात् सारी संगत ने गुरू का अटूट लंगर छका ।
इस दौरन अल्पसंख्यक आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार इकबाल सिंघ लालपुर ने दीवान में पहुंच कर शीश निवाया। महासचिव इंद्रजीत सिंघ खालसा ने बताया कि मुख्य समागम आज गुरुद्वारा जनकपुरी सुबह 4 बजे से दोपहर 3 बजे तक सजेगा। गुरू का लंगर अटूट बरतेगा ।