40 गज के मकानों में नर्सिंग होम, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल
40 गज के मकानों में नर्सिंग होम, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल
बाकरगंज-साले नगर में छोटे भवनों में चिकित्सा संस्थान संचालित होने के आरोप, पंजीकरण और भवन मानचित्र की जांच पर उठे सवाल
मनोज कुमार (जिला संवाददाता)
बरेली। जिले में छोटे-छोटे मकानों में नर्सिंग होम और निजी चिकित्सा संस्थान संचालित होने के आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाकरगंज और साले नगर क्षेत्र में करीब 40 गज के मकानों में भी नर्सिंग होम संचालित होने की चर्चा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन संस्थानों का पंजीकरण करते समय भवन का क्षेत्रफल, स्वीकृत मानचित्र, अग्निसुरक्षा व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों की जांच की गई है।
आरोप है कि कुछ छोटे भवनों में सीमित जगह के बावजूद मरीजों को भर्ती करने और उपचार की सुविधाएं संचालित की जा रही हैं। यदि ऐसा है तो स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
गौरतलब है कि बरेली में पूर्व में भी बिना स्वीकृत भवन मानचित्र के संचालित नर्सिंग होम का मामला सामने आ चुका है। वर्ष 2019 में बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने बिना नक्शा स्वीकृत कराए संचालित किए जा रहे 40 नर्सिंग होम के लाइसेंस निरस्त करने के लिए तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजा था। इसके बाद भी यदि छोटे मकानों में चिकित्सा संस्थान संचालित हो रहे हैं तो विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
जांच हुई तो कार्रवाई कितनी?
बाकरगंज और साले नगर क्षेत्र में संचालित नर्सिंग होम की जांच को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या स्वास्थ्य विभाग ने इन संस्थानों का मौके पर निरीक्षण किया? कितने संस्थान निर्धारित मानकों पर खरे मिले और कितनों के खिलाफ नोटिस या कार्रवाई की गई? यदि जांच नहीं हुई तो इसकी वजह क्या है? इन सवालों के जवाब स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षित हैं। मामले में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित नर्सिंग होम के पंजीकरण, भवन मानचित्र और अन्य अनिवार्य अनुमतियां नियमानुसार हैं या नहीं। विभागीय जांच और दस्तावेज सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।