सील ओटी खुली मिली, फिर भी एफआईआर नहीं, स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल
सील ओटी खुली मिली, फिर भी एफआईआर नहीं, स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल
31 जुलाई को सील की गई थी ओटी, 5 अगस्त के निरीक्षण में दोबारा खुली मिली; विभाग ने नोटिस देकर मांगा जवाब
संवाददाता मनोज शर्मा
बरेली। रामपुर रोड स्थित अरबन हॉस्पिटल की ओटी को स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील किए जाने के बाद दोबारा खुला पाए जाने के मामले ने विभागीय कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल को जारी नोटिस में खुद उल्लेख किया गया है कि 31 जुलाई 2026 को मानक पूरे नहीं मिलने पर अस्पताल की ओटी सील की गई थी। इसके बावजूद 5 अगस्त को दोबारा निरीक्षण के दौरान ओटी खुली मिली। अब सवाल यह है कि सील की गई ओटी बिना अनुमति कैसे खोली गई और इस मामले में अब तक एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई गई?
स्वास्थ्य विभाग के नोटिस के मुताबिक निरीक्षण के दौरान ओटी के संचालन के साथ पैथोलॉजी में जांच और ऑपरेशन किए जाने की बात भी सामने आई। विभाग ने इसे बिना अनुमति अथवा सक्षम अधिकारी के संज्ञान के ओटी खोले जाने से जोड़ते हुए अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल विभाग की अगली कार्रवाई को लेकर है। यदि 31 जुलाई को ओटी सील करने की कार्रवाई नियमों के तहत की गई थी तो 5 अगस्त को उसके खुले मिलने के बाद जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाए गए? क्या मौके पर सील टूटने या हटाए जाने की स्थिति का पंचनामा तैयार किया गया? क्या विभाग ने यह सत्यापित किया कि ओटी में सील के बाद वास्तव में ऑपरेशन हुए थे? यदि विभागीय जांच में इसकी पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
स्वास्थ्य विभाग लगातार मानक पूरे नहीं करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता है। ऐसे में सील की गई ओटी के दोबारा इस्तेमाल की शिकायत या विभागीय निरीक्षण में सामने आई स्थिति कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है। खासकर तब, जब विभाग के अपने नोटिस में ओटी के दोबारा खुले मिलने का उल्लेख किया गया है।
इसी के साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सील किए गए अस्पतालों और उनकी इकाइयों की नियमित निगरानी होती है। यदि किसी अस्पताल की ओटी सील कर दी जाती है तो उसकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी होती है और सील हटने या टूटने की स्थिति में तत्काल क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है?
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष और विभागीय जांच का अंतिम निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में किसी व्यक्ति या संस्था पर मिलीभगत का आरोप तथ्य के रूप में कहना उचित नहीं होगा। हालांकि पूरे प्रकरण में पारदर्शिता के लिए स्वास्थ्य विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि 5 अगस्त के निरीक्षण के बाद क्या जांच की गई, अस्पताल से क्या जवाब मिला और एफआईआर या अन्य कानूनी कार्रवाई पर क्या निर्णय लिया गया।
मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मामले में सिर्फ नोटिस जारी कर जवाब मांगने से आगे की कार्रवाई भी महत्वपूर्ण है। अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अगले कदम पर हैं।