सीएमओ कार्यालय में संविदा कर्मचारी की नियमविरुद्ध संबद्धता पर सवाल
सीएमओ कार्यालय में संविदा कर्मचारी की नियमविरुद्ध संबद्धता पर सवाल
डबल तनख्वाह या ‘मोटी मलाई’ का सवाल, 11 जुलाई 2022 के शासनादेश की अनदेखी
एनएचएम के ब्लॉक अकाउंट मैनेजर को जिला स्तर पर बैठाने का आरोप, शासनादेश की अनदेखी का मामला
बरेली। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत फतेहगंज ब्लॉक में लेखा प्रबंधक (ब्लॉक अकाउंट मैनेजर) के पद पर तैनात संविदा कर्मचारी संतोष कुमार को कथित रूप से नियमों के विपरीत जिला अस्पताल/सीएमओ कार्यालय में संबद्ध किए जाने का मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। इस प्रकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं और शासनादेश के अनुपालन पर भी संदेह जताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, ब्लॉक अकाउंट मैनेजर का मुख्य दायित्व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा कर्मचारियों के वेतन भुगतान, लेखा-जोखा और अन्य वित्तीय कार्यों का निष्पादन करना होता है। आरोप है कि संतोष कुमार को उनकी मूल तैनाती फतेहगंज ब्लॉक में कार्य करने के बजाय सीएमओ कार्यालय में कार्यरत रखा गया है। यहां वह चिकित्सकों की कार्यमुक्ति, ज्वाइनिंग और अन्य प्रशासनिक कार्यों को देख रहे हैं, जो उनके पद और दायित्वों से मेल नहीं खाते। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह व्यवस्था शासन के उस स्पष्ट आदेश के विपरीत है, जिसे तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद द्वारा 11 जुलाई 2022 को जारी किया गया था। इस शासनादेश में सभी संविदा कर्मचारियों को उनकी मूल तैनाती स्थल पर कार्य करने के निर्देश दिए गए थे तथा अनावश्यक संबद्धताओं को तत्काल समाप्त करने की बात कही गई थी। स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि शासनादेश आज भी प्रभावी है तो फतेहगंज ब्लॉक में तैनात कर्मचारी को उसके मूल कार्यस्थल पर भेजा जाना चाहिए। साथ ही सीएमओ कार्यालय द्वारा की गई इस संबद्धता की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि शासनादेश का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। इस मामले में जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी विश्राम सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि संतोष कुमार फतेहगंज ब्लॉक का काम भी देख रहा है और अपनी काबिलियत के चलते सीएमओ कार्यालय में भी कार्य कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि संतोष कुमार उनके कार्यभार संभालने से पहले से ही सीएमओ कार्यालय में कार्यरत है। हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि नियमानुसार कर्मचारी की तैनाती ब्लॉक स्तर पर है तो वह जिला कार्यालय में किस आधार पर कार्य कर रहा है। क्या उसे दोहरी तनख्वाह मिल रही है या फिर किसी अन्य लाभ के कारण यह व्यवस्था बनाई गई है? सूत्रों का यह भी दावा है कि सीएमओ कार्यालय में जिस पद पर संतोष कुमार कार्य कर रहे हैं, वहां वास्तव में सूरज श्रीवास्तव की तैनाती होनी चाहिए। फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि शासनादेश के अनुपालन को लेकर उच्च स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या इस कथित नियमविरुद्ध संबद्धता की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाती है या नहीं।