दीपक तले अंधेरा....दूसरों को सलाह देने वाले
दीपक तले अंधेरा....दूसरों को सलाह देने वाले
अपने कार्यालय में ही लागू नहीं कर पाए नियम
सीएमओ कार्यालय में कूड़े के निस्तारण का अजब गजब तरीका
बरेली। लग रहा है कि नगर निगम बरेली की कचरा उठाने वाली गाड़ी जिला चिकित्सालय में नहीं पहुंचती, क्योंकि अगर ऐसा नही है तो इस तरह के नजारे देखने को नहीं मिलते। नगर निगम बरेली द्वारा जो गाड़ी घर और कार्यालयों से गीला एवं सूखा कूड़ा अलग-अलग कूड़ेदान में इकट्ठा कर शहर के डंपिंग यार्ड में पहुंचाते हैं। सुबह सवेरे ही लोगों को इन गाड़ियों की आवाज कुछ इस तरह सुनाई देती है, कि "गाड़ी वाला आया, घर से कचरा निकाल" बाबजूद इसके जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के ठीक सामने तेज हवाओं से गिरे पेड़ के पत्तों और अन्य कूड़ा करकट इकट्ठा कर आग के हवाले कर दिया गया। जिसकी वजह से पूरा जिला चिकित्सालय धूंए के गुबार से घिर गया। जिस कारण जिला चिकित्सालय में आए हुए मरीज और उनके तीमारदार मुंह पर कपड़ा रखने के लिए मजबूर हो गए, यह वाक्या सुबह लगभग 10:30 का है। जब जिला चिकित्सालय का एक सफाई कर्मचारी पत्तों और इधर-उधर के कूड़े को इकट्ठा कर आग लग रहा था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के आसपास डस्टबिन (कूड़ेदान) होनी ही चाहिए, जो फिलहाल नहीं दिखाई दिए, इसी कारण कूडे करकट को इकट्ठा कर आग के हवाले कर दिया गया। इस घटनाक्रम से स्पष्ट हो जाता है कि स्मार्ट सिटी में संचारी रोग की रोकथाम और इधर-उधर कूड़ा ना फेंकने की सलाह देने वाले अधिकारी के कार्यालय में यह सलाह मानी जाती भी है या नही। इससे तो एक कहावत यहां जरूर सत्य हो जाती है जिसमें कहा गया है कि हमेशा ही "दिया तले अंधेरा होता है"