शराब से बढ़ कर कुछ नहीं, वाकर से ठेके पहुँचे शख्श के लिए शायद यही सही है
शराब से बढ़ कर कुछ नहीं, वाकर से ठेके पहुँचे शख्श के लिए शायद यही सही है
बरेली । शाम होते ही शहर में जाम छलकना चालू हो जाते हैं वहीं एक बुजुर्ग जिसकी टांगों में कोई दिक्क्त थी वह वॉकर द्वारा शराब भट्टी पहुंचा तो चर्चा का विषय बन गया बही आसपास भटक रहे लोगों ने देखा तो कहा साहब यह भी एक जिंदगी है। ना जीने देती है ना मरने देती है। पुराना शहर क्षेत्र नवादा शेखन सतीपुर ठेके का है । एक बुजुर्ग बॉकर द्वारा शराब ठेके पर शराब लेने के लिए वॉकर द्वारा पहुंचा तो आसपास खड़े लोगों ने देखा । तो चर्च का विषय बन गया।