सीएमओ कार्यालय में आउटसोर्स कर्मचारियों की मनमानी, बाबुओं के काम भी उनके हवाले
सीएमओ कार्यालय में आउटसोर्स कर्मचारियों की मनमानी, बाबुओं के काम भी उनके हवाले
कुलदीप की दिल्ली क्राइम ब्रांच से गिरफ्तारी के बाद भी नहीं चेते अफसर, सरकारी रिकॉर्ड और प्रशासनिक कार्यों में दखल पर उठे सवाल
बरेली। स्वास्थ्य विभाग में नियमों को ताक पर रखकर काम कराने का आरोप है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में आउटसोर्स कर्मचारियों से निर्धारित सहायक कार्यों के बजाय बाबुओं की जिम्मेदारी वाले प्रशासनिक काम भी कराए जा रहे हैं। आरोप है कि सीएमओ विश्राम सिंह के नेतृत्व में कुछ आउटसोर्स कर्मचारी कार्यालय की कार्यप्रणाली में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इससे सरकारी रिकॉर्ड, पत्रावलियों और विभागीय प्रक्रिया से जुड़े कार्यों की गोपनीयता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि हाल ही में आउटसोर्स कर्मचारी कुलदीप को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था। इसके बावजूद सीएमओ कार्यालय में आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा और जिम्मेदारियों के निर्धारण को लेकर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। हालांकि, कुलदीप की गिरफ्तारी और कार्यालय में कराए जा रहे प्रशासनिक कार्यों के बीच संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को जिन कार्यों के लिए नियुक्त किया जाता है, उनसे अलग जिम्मेदारी सौंपने के लिए स्पष्ट आदेश और निगरानी जरूरी है। सवाल यह है कि क्या सीएमओ कार्यालय में ऐसे कर्मचारियों को प्रशासनिक कार्य सौंपने की अनुमति है? यदि है तो किस आदेश के तहत? और यदि नहीं, तो नियमों के उल्लंघन की जिम्मेदारी किसकी होगी? अब स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों की भूमिका पर भी नजर है। क्या वे मामले की जांच कराएंगे या फिर आउटसोर्स कर्मचारियों से बाबुओं के काम कराने की व्यवस्था यूं ही चलती रहेगी?