बरेली कोर्ट में घोटाला! मुर्दे के नाम पर जमानत, अब क्लर्क पर शक
बरेली कोर्ट में घोटाला! मुर्दे के नाम पर जमानत, अब क्लर्क पर शक
बरेली। न्यायिक व्यवस्था की जड़ें हिलाने वाला मामला सामने आया है। बरेली के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-1 में मृत व्यक्ति के आधार कार्ड और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी जमानतनामा दाखिल करने का मामला अब कोर्ट के अपने क्लर्क तक पहुंच गया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बरेली के आदेश पर दी गई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 23 अक्टूबर 2024 को थाना बारादरी के मुकदमा संख्या 707/2023 में जमानतनामे अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-1 में पेश किए गए थे। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि ये जमानतनामे किसके चार्ज में थे और किसकी जिम्मेदारी थी?
रिपोर्ट में साफ उल्लेख:
उस समय कोर्ट में लिपिक के पद पर कार्यरत श्री राज कुमार (16 मई 2024 से 13 अगस्त 2025 तक) को पीठासीन अधिकारी के आदेश (29 मई 2024) के तहत थाना बारादरी के सभी स्टेट वादों की फाइलों का रख-रखाव सौंपा गया था।
जमानतनामे पेश करने की जिम्मेदारी भी उसी की थी।शिकायतकर्ता श्री शारिक ने इस पूरे प्रकरण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था, जिसकी प्रतिलिपि जनपद न्यायाधीश बरेली को भेजी गई। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।शिकायतकर्ता ने बाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी पत्र लिखा, जिस पर जनपद न्यायाधीश ने सिर्फ "सीन" कर दिया। अब प्रशासनिक अधिकारी की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि वर्तमान में इस प्रकरण में कोई विभागीय जांच लंबित नहीं है।
यह मामला इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि इसमें मृत व्यक्ति को जमानती बनाकर आरोपी को जमानत दिलाने की कोशिश की गई। कोर्ट के अंदर ही फर्जीवाड़ा होने के आरोप अब उसके अपने कर्मचारी पर आ रहे हैं।
सवाल ये हैं:
क्या कोर्ट में फाइलों की देखभाल करने वाला क्लर्क इस फर्जी जमानतनामे से अनजान था?पीठासीन अधिकारी के समक्ष पेश किए गए दस्तावेजों की जांच कौन कर रहा था?
शिकायत सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचने के बावजूद जनपद न्यायाधीश ने सिर्फ "सीन" क्यों कर दिया?
न्यायालय की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने वाला यह मामला बरेली की अदालतों में सिस्टम की लापरवाही को उजागर करता है। क्या अब इस पर सीबीआई या उच्च स्तरीय जांच होगी या फिर फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाएंगी?
प्रशासनिक अधिकारी, जनपद न्यायालय बरेली ने 26 मार्च 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंपी रिपोर्ट में पूरी डिटेल दी है। अब देखना होगा कि माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इस रिपोर्ट पर क्या कड़ा कदम उठाते हैं।