Wednesday, 04-11-2026
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बालगंधर्व कला अकादमी द्वारा बरेली में एक भव्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन

बालगंधर्व कला अकादमी द्वारा  बरेली में एक भव्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन


बरेली।आपको बता दे कि भारत की जाने माने सर्वोच्च प्रतिष्ठित संस्थान एवं राष्ट्रीय मंच बालगंधर्व कला अकादमी परिवार, मुंबई जो की  केंद्रीय मंत्रालय एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा शिक्षा एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में अपने अमूल्य योगदान के लिए पुरस्कार प्राप्त संस्थान है इनके तत्वावधान में दिनांक 16 जून 2025 को उत्तर प्रदेश बरेली में एक भव्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक संध्या में उत्तर प्रदेश के अनेक ख्यातिप्राप्त कवियों एवं शायरों ने अपनी उपस्थिति से महफ़िल में चार चाँद लगाए। अपने-अपने अंदाज़ में प्रेम, सामाजिक सरोकार, एकता और समरसता पर आधारित रचनाओं की प्रस्तुति देकर सभी ने श्रोताओं का मन मोह लिया। 

इस अवसर पर बालगंधर्व कला अकादमी परिवार के माननीय निदेशक महोदय ने अपने संबोधन में कहा कि –

“एक सच्चे कलाकार की पहचान उसकी सच्चाई, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों में होती है। कला का कोई धर्म नहीं होता, और कलाकार की कोई जाति नहीं होती। यदि कोई कलाकार इन मूल्यों के साथ पूर्ण समर्पण नहीं कर पाता, तो वह सच्चा कलाकार कहलाने के योग्य नहीं है। आज ज़रूरत है कि हम अपनी क़लम को केवल इश्क़-मोहब्बत तक सीमित न रखें, बल्कि उसका उपयोग सामाजिक बदलाव, राष्ट्रीय एकता, और भारत की सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के लिए करें। कला राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है, और हम सभी को अपने शब्दों से नए भारत की पहचान गढ़नी चाहिए।” निदेशक महोदय के इन प्रेरणादायक शब्दों से पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। यह कार्यक्रम न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बना, बल्कि कलाकारों को एक सशक्त मंच और समाज के लिए सार्थक संदेश भी प्रदान कर गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खुशलोक के निदेशक श्री विनोद प्रग्रानी । गेस्ट ऑफ ऑनर रहीं मिस उजमा क़मर, जबकि विशेष अतिथियों में डॉ. शगुफ़्ता यासमीन, रोशनी ख़ान, डॉ. अनीस बेग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संचालन में कई प्रतिष्ठित कवि एवं शायर मंच पर आसीन रहे, जिनमें प्रमुख नाम हैं: सुनैना जिलानी, मणि सरस्वत, मुन्तज़िर फिरोज़ाबादी, चाँद ककरालवी, सलमान शम्स, शान जिया, सचिन अग्रवाल, सुहैल आज़ाद, डॉ. तस्लीम शैरी, फ़हीम दानिश, शान मिस्वाही, अली शारिक, ज़ाकी तारीक बाराबंकी, शफ़ीक़ रिठौरीवी, माहवर सिरसावी, यूनुस चिश्ती, इरफ़ान आबिद, अहमद अज़ीम, ज़ुनेद शाद आदि। इन सभी साहित्यकारों ने अपने शब्दों से न केवल प्रेम और मोहब्बत की खुशबू बिखेरी, बल्कि सामाजिक सरोकारों को भी स्वर दिए।

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