गेहूं खरीद केंद्रों पर किसानों का आरोप, मजदूरी और तुलाई के नाम पर हो रही अवैध वसूली
गेहूं खरीद केंद्रों पर किसानों का आरोप, मजदूरी और तुलाई के नाम पर हो रही अवैध वसूली
बरेली ....सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि केंद्र प्रभारी शासन द्वारा निर्धारित नियमों को दरकिनार कर मजदूरी और तुलाई के नाम पर खुलेआम अवैध वसूली कर रहे हैं। किसानों के अनुसार जहां मजदूरी का निर्धारित शुल्क लगभग ₹20 प्रति कुंतल होना चाहिए, वहीं किसानों से ₹40 तक वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं तुलाई और अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर भी किसानों से ₹100 प्रति कुंतल तक अतिरिक्त रकम मांगी जा रही है।
किसानों का आरोप है कि यदि कोई किसान अतिरिक्त पैसा देने से मना करता है तो उसकी गेहूं तौल में देरी की जाती है या फिर गुणवत्ता में कमी बताकर उसे परेशान किया जाता है। कई किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी बिना “सुविधा शुल्क” दिए उनकी उपज की खरीद नहीं की जा रही।
ग्रामीण क्षेत्रों से आए किसानों का कहना है कि एक ओर डीजल, खाद और बीज की बढ़ती कीमतों ने खेती की लागत बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर सरकारी खरीद केंद्रों पर हो रही अवैध वसूली ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खरीद केंद्रों की जांच कर दोषी केंद्र प्रभारियों और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
किसानों का यह भी कहना है कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार के कारण किसानों को उचित समर्थन मूल्य का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। खरीद केंद्रों पर फैली अव्यवस्थाओं और कथित भ्रष्टाचार से किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। मामला मंडी समिति बरेली का बताया जा रहा है
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और खाद्य विभाग किसानों की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अवैध वसूली पर कब तक रोक लग पाती है।