दुनिया की सबसे महंगी जमीन पर हुआ था साहिबजादों एवं माता गुजर कौर जी का संस्कार
शिवी शर्मा:-
दुनिया की सबसे महंगी जमीन पर हुआ था साहिबजादों एवं माता गुजर कौर जी का संस्कार
बरेली। गुरुद्वारा श्री गुरू सिंघ सभा गुरू गोबिंद सिंघ नगर माडल टाउन में साहिब जादों की शहादत का इतिहास सुनाने के लिए पंथ प्रसिद्ध सिक्ख प्रचारक भाई सुखविंदर सिंघ रटौल आनंदपुर साहिब वालों ने इतिहास का मार्मिक वर्णन प्रारम्भ किया, उन्होंने बताया कि गुरू नानक देव जी ने गुरुबाणी में पहले ही वर्णित कर दिया था कि
जउ तउ प्रेम खेलन का चाउ, सिर धर तली गली गली मेरी आओ । इत मारग पैर धरीजै सिर दीजै कान न कीजै। आज के दिन दुनिया की सबसे महँगी जमीन खरीद कर साहिबजादों एवं माता गुजर कौर का दाह संस्कार किया गया था। दाह संस्कार के लिए दीवान टोडरमल ने मुगलों से जगह मांगी तो उन्होंने सोने की मोहरें बिछाकर जमीन देने पर हामी भरी। इस पर दीवान टोडरमल ने हजारों सोेने की मोहरों को बिछाकर जगह बनाई तो मुगल अपनी बात से पलट गए और उस जगह को मोहरें खड़ी कर भरने को कहा इस तरह से 78000 सोने की मोहरे मतलब 800 किलो सोना बिछाकर जगह खरीदी गई थी जो आज के हिसाब से
2 अरब 50 करोड़ की कीमत में होती है इस तरह
दुनियां की सबसे कीमती जमीन पर साहिबजादों एवं माता गुजर कौर का दाह संस्कार किया गया था। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मालिक सिंह कालड़ा ने बताया कि सुखविंदर सिंघ रटौल 31 दिसम्बर तक सुबह शाम इतिहास से संगत को रूबरू करवाएंगे।