Thursday, 06-08-2026
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परिजनों को पकड़ा दिया सील बन्द किसी और का शव

शव पतला देख हुआ शक, चेहरा देख हुआ हंगामा


ड्रिप लटकाने वाली रॉड लेकर हमलावर हुया स्टॉफ, आरोप



बरेली।         अभी मिनी बायपास स्थित सनराइज अस्पताल में तोड़फोड़ के मामले को मात्र दो ही दिन बीते हैं कि अब पीलीभीत रोड महानगर के सामने स्थित अपेक्स अस्पताल में फिर से हंगामा खड़ा हो गया मामला था शव बदलने का। परिजनों को किसी और का शव पकड़ा दिया गया जो काफी पतला था जबकि परिजन के मुताबिक उनके मृतक व्यक्ति 80 से 85 किलो के रहे होंगे जिसको देखकर उन्हें शक हुआ सील बंद शव को जबरन खोल कर देखा तो वह कोई और था जिसको लेकर परिजनों ने अस्पताल के स्टाफ से बात की आरोप है कि स्टाफ इतनी बात पर ही मारपीट पर उतारू हो गया स्टाफ के लोग ग्लूकोस लटकाने वाली रॉड लेकर मारने को दौड़े मजबूरन परिजनों को भीड़ इकट्ठी करनी पड़ी अभी मामला तूल ही पकड़ा था कि। एक मृतक के परिजन और बिलखते हुए वहां पहुंच गए उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने मृतक का चेहरा श्मशान भूमि में जाकर देखा तो वह कोई और था वह अपने मृतक  शव को ढूंढने के लिए वहां पहुंचे थे। जानकारी के मुताबिक 52 वर्षीय हरीष चंद्र गुप्ता निवासी कटरा चांद खां बुधवार को अस्पताल में भर्ती हुए थे जहां रात के समय उनकी मौत हो गई थी सुबह जब परिजनों को शव सौंपा गया तो वह किसी और का था जिसपर बबाल हो गया तब तक ऐटा के राजा का रामपुर निवासी मृतक 65 वर्षीय सुरेश चंद्र के परिजन वहां पहुंचे तो मौजूदा शव सुरेश का था। सुरेश के पुत्र रोहित शर्मा ने बताया कि जब शमशान जाकर अंतिम दर्शन के लिए चेहरा देखा तो मृतक कोई और था जिस पर वह अपने पिता का शव लेने के लिए वापस आया है हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई एवं पुलिस की मौजूदगी में ही एंबुलेंस द्वारा शमशान से हरीश चंद्र का शव मंगाया गया एवं परिजनों को सही शव मिल सके। इस मामले में अस्पताल प्रबंधक ने अपनी गलती स्वीकारते हुए माफी मांग ली।



तीन दिन से नहीं आए डॉक्टर कैसे हो रहा ईलाज



दूसरी तरफ कर्मचारी नगर रहने वाले शुभम सक्सेना एवं उसकी पत्नी आस्था सक्सेना ने बताया कि उनके पिता बाबूराम सक्सेना पेशे से वकील थे उनको 3 दिन पहले यहां भर्ती कराया था परंतु 3 दिन से ही उनका इलाज कर रहे डॉ अरुण कुमार शाह अस्पताल में नजर नहीं आए जबकि उनकी फाइल पर रोजाना डॉक्टरों के हस्ताक्षर हो रहे हैं तो इस तरह से डॉक्टर बिना अस्पताल में आए मरीजों का इलाज कर रहे हैं उन्होंने बताया कि जैसे ही बाहर हंगामा चालू हुआ है वैसे ही डॉक्टरों ने सूचना दे दी कि उनके पिता के प्राण भी जा चुके हैं जबकि 5 मिनट पहले वह सही थे इसी तरह अन्य मरीजों ने भी डॉ ना होने का आरोप लगाते हुए बताया अस्पताल में डॉक्टर दीपक एवं डॉ अरुण कुमार शाह कई दिनों से अस्पताल में नहीं आ रहे



अगर अग्नि भेंट हो जाता शव तो बढ़ सकता था हंगामा



जैसा कि मृतक शव आपस में बदल गए थे एवं एक शव श्मशान भूमि पहुंच भी चुका था अगर अंतिम वक्त पर परिजन शव की सील तोड़ कर उसका चेहरा ना देखते तो दाह संस्कार हो चुका होता ऐसे में जिम्मेदार कौन होता। इसमें अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है जिसके चलते कुछ समय पूर्व ही मिनी बायपास स्थित सनराइज अस्पताल में भी तोड़फोड़ हुई थी परंतु शायद स्वास्थ्य विभाग का खुद स्वास्थ्य सही नहीं है जो कि अस्पताल अपनी मनमानी किए जा रहे हैं

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