मृत जमानती के आधार पर जमानत का आरोप, कोर्ट ने दिए जांच के आदेश
मृत जमानती के आधार पर जमानत का आरोप, कोर्ट ने दिए जांच के आदेश
27 मार्च 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश
बरेली। न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बरेली ने जमानत प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़े के एक गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासनिक जांच के आदेश दिए हैं। मामला प्रकीर्ण वाद संख्या 1650/2025 से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि एक आरोपी को मृत व्यक्ति को जमानती बनाकर जमानत दिलाई गई।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार दुबे की अदालत में दायर प्रार्थना-पत्र के अनुसार, थाना बारादरी में पंजीकृत मुकदमा संख्या 707/2023 में आरोपी शमशाद हुसैन सहित अन्य के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल हुआ था। 23 अक्टूबर 2024 को आरोपियों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर जमानत कराई। इसी दौरान शमशाद हुसैन की ओर से अनीस अहमद नामक व्यक्ति को जमानती बताया गया।
प्रार्थी का आरोप है कि जमानती अनीस अहमद की मृत्यु 27 जून 2023 को हो चुकी थी और उसका मृत्यु पंजीकरण नगर निगम में दर्ज है। इसके बावजूद मृत व्यक्ति के आधार कार्ड, वाहन आरसी और फोटो के सहारे जमानतनामा दाखिल कर दिया गया, जिसे उसी दिन न्यायालय से स्वीकृति भी मिल गई।
आरोप है कि बाद में मामले का खुलासा होने पर जमानतनामे की सत्यापित प्रति देने से इनकार किया गया और कथित रूप से कार्यालय के तत्कालीन लिपिक राजकुमार की मिलीभगत से मूल जमानतनामा पत्रावली से हटवाकर दूसरा जमानतनामा रख दिया गया। प्रार्थी ने इसे न्यायालय के साथ धोखाधड़ी करार देते हुए हस्तलेख विशेषज्ञ से जांच और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
अदालत ने पत्रावली के अवलोकन के बाद माना कि आरोप गंभीर हैं। बीएनएसएस की धारा 175(4) के तहत जनपद न्यायालय बरेली के संबंधित प्रशासनिक अधिकारी को पूरे प्रकरण की विधिवत जांच कर 27 मार्च 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।