नारी शक्ति की मिसाल बनी बरेली की एडवोकेट पूजा मिश्रा
नारी शक्ति की मिसाल बनी बरेली की एडवोकेट पूजा मिश्रा
अपनी सूझबूझ से फर्जी दरोगा को पकड़वाया
फेसबुक से की दोस्ती शादी का प्रस्ताव रखने के लिए बना फर्जी दरोगा
बरेली बेटियों की पढ़ाई कितनी जरुरी है। यह बात बरेली की वकील बेटी के मामले में सही साबित हुई। जिसने समझदारी दिखाते हुए फर्जी दरोगा को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। बताते चलें की सिविल लाइन में एक छोटा सा ढाबा चलाकर जगदीश मिश्रा एवं आशा मिश्रा ने अपनी पुत्री पूजा मिश्रा को वकालत की पढ़ाई के लिए पूरा साथ दिया एवं मेहनत रंग लाई और 2021 में पूजा मिश्रा को वकालत का रजिस्ट्रेशन भी मिल गया। पूजा मिश्रा पांच भाई बहनों में दूसरे नंबर पर है जबकि बाकी एक बहन और तीन भाई अभी पढ़ाई कर रहे हैं एक खास मुलाकात में जगदीश मिश्रा ने बताया कि उन्हें बहुत खुशी है की उनकी बेटी आज इस मुकाम पर पहुंच गई है आखिर सच है कि मेहनत रंग लाती है मूल रूप से सिविल लाइंस में ही रहने वाली पूजा मिश्रा ने अपनी सूझबूझ एवं अपनी सीखी हुई वकालत के जरिए एक बड़ा काम कर दिखाया है जिसमें अपने आप को फर्जी दरोगा बताने वाले टैक्सी चालक को जेल भिजवा दिया। एडवोकेट पूजा मिश्रा के मुताबिक उसकी फर्जी दरोगा सत्यम से फेसबुक पर मुलाकात हुई थी। तब सत्यम ने बताया कि वह पुलिस विभाग में लखनऊ के हजरतगंज में दरोगा के पद पर तैनात होने के साथ एक ब्राह्मण युवक है। वह उससे शादी करना चाहता है। उसने वर्ष 2016 में पुलिस को ज्वाइन किया है। तब पूजा ने सत्यम से कहा कि आप हमारे हमारे लिए अजनबी हो , इसलिए एक बार बरेली उसके घर आ जाओ। फिर उसके बाद तब हम आपके घर आते है। तब सत्यम ने बताया कि उसके मां बाप की मौत एक कार एक्सीडेंट में हो चुकी है। उसे उसके मामा ने पाला पोसा है। वह बड़ी मेहनत के बाद पुलिस ने दरोगा बन पाया है। इसके बाद उसने सत्यम को बरेली आकर उसे देख जाने को कहा। सत्यम लखनऊ से अकाल तख्त एक्सप्रेस से बरेली पहुंचा। बरेली पहुंचने पर शक होने पर पूजा ने सत्यम से उसकी आईडी मांगी । उसने सत्यम से पूछा कि आपको किसी केस की विवेचना मिलती है तो उसे कैसे किया जाता है , साथ ही उसने पूछा धारा -61 – 64 क्या होती है। उसे भी नहीं बता पाया। उसे यह भी नहीं पता था कैसे विवेचना और पत्ता काटा जाता है। शक होने पर महिला अधिवक्ता ने अपने जानने वाले दरोगा सत्यम के आईकार्ड के साथ अन्य प्रूफों को भेजा और पूछा क्या यह यह दस्तावेज सही है। बाद में उसके जानने वाले दरोगा पुलिस लाइन पहुंचे और सत्यम को भी बुलाया। उसने यह भी बताया कि पुलिस लाइन उसकी परिचित रेखा नाम की एक दरोगा है वह उनसे मिलने पुलिस लाइन आया है।
सत्यम के पुलिस लाइन पहुंचने पर उसके जानने वाले दरोगा ने सत्यम से 3 /25 की पत्रावली कैसे बनाई जाती है। इसमें क्या लिखते हो , जब उसके परिचित दरोगा ने उसे पकड़ा तो यह वहां से भागने लगा। उस समय सत्यम पुलिस की प्रॉपर ड्रेस में था। उस समय उसने सत्यम से पूछा तुम्हे पुलिस की ड्रेस में आने की क्या जरुरत थी तब उसने जवाब दिया कि वह दरोगा है तो इसलिए वह दरोगा की ड्रेस में आया है। सूचना पर कोतवाली पुलिस ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया। महिला अधिवक्ता ने बताया कि उसकी फर्जी दरोगा से मुलाकात फेसबुक पर हुई थी। दरोगा ने उसे बनारस का रहने वाला बताया था। लखनऊ के हजरतगंज में अपनी पोस्टिंग बताई थी। वह दो तीन दिन से एफबी के माध्यम से संपर्क में आई थी। फोन खुलने पर जेल जाते वक्त सत्यम फूट-फूटकर रो रहा था और कह रहा था कि उसे नहीं पता था की पोल खुल जाएगी नहीं तो वह अधिवक्ता को सब सच बताता वह अधिवक्ता से प्रभावित होकर विवाह का प्रस्ताव रखने के लिए झूठ का सहारा ले रहा था असल में सत्यम मूल रूप से वाराणसी का रहने वाला है और लखनऊ में टैक्सी चलाकर पैसा कमाता है फिलहाल पुलिस ने सत्यम को जेल भेज दिया है वही एडवोकेट पूजा मिश्रा ने मुलाकात में बताया कि हर लड़की को अपनी सुरक्षा देखते हुए सूझबूझ का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे कोई भी व्यक्ति किसी युवती यां महिला का गलत इस्तेमाल ना कर सके।
फिलहाल उसने मामले की शिकायत पुलिस से नहीं की है। उसने केवल उसके बारे में पुलिस को सूचना दी थी।