तो क्या स्मार्ट सिटी पर होना चाहिए 302 का मुकदमा पहले भी लाखों पौधों
मनोज शर्मा
तो क्या स्मार्ट सिटी पर होना चाहिए 302 का मुकदमा
पहले भी लाखों पौधों की हो चुकी है हत्या बाकी को भी रखा जा रहा है प्यासा
वन एवं पर्यावरण मंत्री के शहर में ही हो रही बड़ी लापरवाही
बरेली एक तरफ कुछ समय पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री पौधे लगाकर पर्यावरण को बढ़ावा देने की मुहिम चलाई थी जिसके तहत तमाम छोटे-मोटे नेता व संस्थाओं ने कुछ पौधे लगाकर फोटो अखबार में छाप कर सोशल मीडिया पर डालकर वाह वाई लूटी थी वही सिटी को स्मार्ट बनने वाली स्मार्ट सिटी की तरफ से भी तमाम डिवाइडर व ओवर ब्रिज के पिलर पर हरियाली दिखाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर लाखों पौधे लगा दिए और बात भी सही है कमीशन का खेल बड़ा है न पर जहां किसी भी प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए संबंधित तजुर्बे कार की राय ली जाती है तो इसमें नहीं ली अगर ली तो लाखों पौधे क्यों मर गए शायद इसका जवाब किसी के पास नहीं है जिस फॉर्म ठेकेदार को ठेका दिया गया है उसका कार्यकाल 5 साल का है लेकिन उसके द्वारा कोई देखरेख नहीं हो रही है जो पौधे बेचारे बचे हैं वह भी प्यास जिंदगी व मौत के बीच जूझ रहे हैं अगर यह माने कि इंसान को जीवन देने वाले और इनमें भी जीवन होता है तो लाखों पौधों की हत्या पर स्मार्ट सिटी पर 302 की एफ आई आर तो बनती है मामला सेटेलाइट के डिवाइडरों का है जहां महीनो से नहीं दिया जा रहा पानी पेड़ रहे हैं सुख